Eternal Jyoti

Mandir Jot Darshan

The Mandir Jot Darshan section offers devotees an online glimpse of the sacred Akhand Jyoti of Baba Mohan Ram Ji, revered as his divine jyoti-swaroop and continuous presence. This eternal flame, inspired by the jyoti burning at Kali Kholi–Milakpur Dham, is cherished by devotees who believe that sincere darshan and offerings to the jyoti help remove obstacles and bring inner peace, protection and blessings. By presenting the sacred Jot on this website, the trust enables devotees in Delhi, across India and around the world to connect with Baba Mohan Ram Ji’s grace from wherever they are, turning every digital darshan into a moment of prayer, gratitude and silent seva.
Uplifting Devotional Songs of Baba Mohan Ram Ji

Bhajans & Aartis

Listen to and download soul-stirring Bhajans and Aartis dedicated to Baba Mohan Ram Ji, including timeless tracks like Aarti Baba Mohan Ram Ki, Jai Jai Mohan Ram, and Kali Kholi Ke Sardar. These powerful devotional songs from Kali Kholi Dham tradition bring peace, remove obstacles, and deepen bhakti, available for free streaming or offline download directly on the BMRJ Trust website. Perfect for daily prayer, temple darshan, or sharing Baba Mohan Ram Ji’s divine grace with family and devotees.

Bhagat Ji & Aarti Sangrah

Honouring Baba Mohan Ram Ji Kay Bhagat and Sacred Aartis
This page honors Baba Mohan Ram Ji Kay Bhagat Ji as the guiding pillars of the temple community, whose wisdom, blessings and seva support every devotee seeking spiritual solace and practical help.

नीचे बाबा मोहन राम जी की प्रमुख आरतियाँ दी गई हैं, जो सामान्यतः खोली धाम और मिलकपुर मंदिर में भक्तों द्वारा प्रेम और श्रद्धा से गाई जाती हैं, ताकि हर भक्त घर बैठे भी आरती, दर्शन और जुड़ाव का अनुभव कर सके.

बाबा मोहन राम जी की दर्शन आरती

जगमगजगमगजोतजगीहै, मोहनआरतीहोनेलगीहै।
पर्वतखोलीकासिंहासन, जिसपरमोहनलगातेआसन।
मंदिरदेतेभाषण, उसमोहनकीजोतजगीहै।

कलयुगमैंअवतारलियोहै, पर्वतऊपरवासकियोहै।
गाँवमिलकपुरमंदिरतेरा, जहाँदुखियोंकालगरहाडेरा।
ज्ञानकावहांभंडारभराहै, सीताफलकावृक्षखड़ाहै।

यहाँपरतुमदिलरखोसच्चा, सभीहैंइसमेंबूढ़ा – बच्चा।
प्रेमसेमिलकरशक्करबाँटो, बाबाजीजोहड़छाँटो।

अंधेकोतुमनेत्रदेते, कोढ़िनकोदोगेकाया।
बाँझनकोतुमपुत्रदेते, निर्धनकोदोगेमाया।

नन्दूजीकोतुमदर्शाये, गाँवमिलकपुरमंदिरबनवाये।
शिवजीकावासकराये, अपनीमायाकोदर्शाये।

नेतरामजीकीयहीविनती, प्रेमसेमिलकरबोलोआरती।
उसमोहनकीजोतजगीहै, मोहनआरतीहोनेलगीहै।

इतिबाबामोहनरामआरतीसंपूर्णम्

बाबामोहनरामजीकी मंगलआरती

गणेशाम्बिकाभ्यांनमः

आरतीखोलीवालेका, कृष्णकेअवतारीका।
मोहनमुरलीवालेका, नृसिंहअवतारीका॥

आरतीबंशीवालेका

धन्नाजाटतेरीधन्यकमाई, जिसनेप्रीतिहरिसंगलायी।
एकमनहोकरनामरटाई, हुएपत्थरमेंप्रकटकन्हाई॥

कर्मातूनेबातपिताकीमानी, खिचड़ीखिलामोहनकोठानी।
खिचड़ीखायपियाहरिनेपानी, तेरीजगमेंहुईअमरकहानी॥

प्रह्लादनेज्ञानदियाभारी, कणकणमेंप्रभुहितकारी।
पितानेखड़्गखम्बमेंमारी, प्रकटहुएनृसिंहअवतारी॥

मीरानेलीहरिकीमाला, दिखेपत्थरमेंनन्दलाला।
पीगईजहरभराप्याला, नागबनेफूलोंकीमाला॥

द्रौपदीनेतेरानामलिया, हाथजोड़तेराध्यानकिया।
तुरन्ततूनेचीरबढ़ादिया, दुःशासनकोहरादिया॥

मोरध्वजकीभक्तिभारी, बनगएअर्जुनकृष्णभिखारी।
जबदहाड़शेरनेमारी, लईपरीक्षाप्रभुनेन्यारी॥

नरसीनेत्यागदीधनमाया, ज्ञानहुआशरणतेरीआया।
सिरसामेंस्वर्णबरसाया, बनसांवळशाहतेनेभातभराया॥

गजगृहयुद्धहुआभारी, गजडूबनकीहुईतैयारी।
आयेसुदर्शनचक्रधारी, मारग्राहऔरगजकीविपदाटारी॥

कीमहिमाभारी, जयबाबाभोलेभंडारी।
तेरीखोलीकीसरदारी, भक्तिभक्तोंनेधारी॥

लक्ष्मीपतिहरिकीमाया, त्यागबैikunth ब्रजआया।
रूपरंगराधामनभाया, लूटकेदधिमाखनखाया॥

सीताजीकारामतूहीहै, राधाजीकाश्यामतूहीहै।
संकटमोचननामतूहीहै, बाबामोहनरामतूहीहै॥

इतिबाबामोहनरामआरतीसंपूर्णम्

भक्ति और संरक्षण की स्तुति

बाबा मोहन राम जी चालीसा

श्री बाबा मोहन राम चालीसा भक्तों के लिए एक दिव्य प्रार्थना है, जिसमें बाबा मोहन राम जी की महिमा, कृपा और रक्षक स्वरूप का वर्णन किया गया है। श्रद्धा से चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति, साहस, संकटों से रक्षा और परिवार के कल्याण की भावना प्रबल होती है, इसलिए इसे खोली धाम और मिलकपुर धाम के भक्त विशेष रूप से अपनाते हैं।

चौपाई:
विधिसेहारेमोहनरामपुकारे, खोलीवालासबकेकाजसंवारे॥
ज्ञानबुद्धियशसुखकेदाता, संकटहरोबलदाऊकेभ्राता॥

जयहोबाबामोहनराम, सिद्धकरोभक्तनकेकाम।
नीलेघोड़ेकेअसवार, भवसागरसेकरोपार॥

मुखमण्डलपरतेजनिराला, गलेमेंदमकेमोहनमाला।
डमरूघंटीऔरभभूत, जपमोहननामलेछूट॥

ब्रह्माविष्णुमहेशतुमस्वामी, तीनोंदेवद्योततेप्रणामी।
रूपतुम्हारान्याराभाई, ज्ञानभक्तिकोसागरपाई॥

धरमदासकोदीबताई, खोलीधामकियासगाई।
तुमहोअखण्डज्ञानकेदाता, निर्धनकोदोगेमाया॥

अंधोंकोदोगेनेत्रप्यारे, बांझनकोपुत्रउपजारे।
भक्तनकेतूसाथनिभावे, सच्चेमनसेजोगुणगावे॥

मिलकपुरगाँवमंदिरतेरा, जहाँभक्तनकालगताडेरा।
सीताफलकावृक्षखड़ाहै, ज्ञानकाभंडारबड़ाहै॥

परबतऊपरवासकियोहै, जहाँकर्मकानाशकियोहै।
कलियुगमेंअवतारलियोहै, भक्तनकाभरोसादियोहै॥

जाकेघरपढ़ेचालीसा, दूरहोजाएसबकीपीड़ा।
जिसकेमनमेंभक्तिसमाई, बाबामोहनरामसहाई॥

पूजतजोश्रद्धासेकरता, जीवनउसकेसुखसेभरता।
पीपलनीमजहाँतूबैठे, दर्शनसेभक्तपापथके।

जोसुमिरनकरताप्रभुनाम, कामनाएँसबफलवान।
सुखशांतिउसकेघरआई, मोहनकृपासदाभरपाई॥

दीनदयालभक्तवत्सल, करोकृपाहेमोहनअचल।
संकटमोचन, दुखहरण, भवसागरकेतारण॥

मोहनरामकरोउद्धार, भवबंधनसेदोपार।
जनकेमनकीपूर्तिकरो, कृपाअपनीसदाधररहो॥

दोहा:
जोनरचालीसापढ़े, अर्जसुनिलेमोहनराम।
घरमेंसुखशांतिसदा, करेंभक्तकल्याण॥